
रायगढ़-खरसिया, 07 जुलाई। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित खरसिया का बिंजकोट और दर्रामुड़ा इलाका इन दिनों एक अजीब कशमकश से गुजर रहा है। यहां मेसर्स सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड कंपनी का बिजली प्लांट है, जहां कोयले से बिजली बनाई जाती है। इस प्लांट की वजह से इलाके में चौबीसों घंटे भारी गाड़ियों, ट्रेलरों और हाइवा का आना-जाना लगा रहता है। कभी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी कुर्रूभांठा से बिंजकोट की डामर वाली सड़क इन भारी वाहनों का बोझ नहीं सह पाई। नतीजा यह हुआ कि सड़क पूरी तरह टूट गई और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए।
कंपनी की गाड़ियों से उड़ने वाली धूल और फ्लाई ऐश ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। गर्मियों में आंखों में चुभती धूल और बरसात में घुटनों तक का कीचड़ इस रास्ते की पहचान बन चुके थे। बिंजकोट, दर्रामुड़ा, बड़े जामपाली और कुर्रूभांठा के ग्रामीणों ने कई बार इस बदहाली के खिलाफ आवाज उठाई। उनकी लगातार मांग के बाद आखिरकार कंपनी प्रबंधन झुका और उसने प्लांट के मेन गेट से ग्राम दर्रामुड़ा बाजार चौक से बड़े जामपाली होते हुए कुर्रूभांठा तक आरसीसी (कंक्रीट) सड़क बनाने की मंजूरी दे दी।
आधे रास्ते में आकर क्यों थम गए पहिए
ग्रामीणों की मांग पर अमल शुरू हुआ और कंपनी के मेन गेट से लेकर दर्रामुड़ा के बाजार चौक तक चमचमाती कंक्रीट की सड़क बनकर तैयार भी हो गई। इस हिस्से के बनते ही बिंजकोट और दर्रामुड़ा के लोगों ने राहत की सांस ली है और वे कंपनी प्रबंधन का आभार भी जता रहे हैं। लेकिन कहानी का दूसरा पहलू बेहद परेशान करने वाला है। बाजार चौक से आगे की सड़क का काम अचानक रुक गया है। अब इसके आगे की राह गड्ढों और धूल से भरी है, जिसने बाकी बचे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पता चला है कि इस अधूरे हिस्से के निर्माण में जमीन का पेंच फंस गया है। बड़े जामपाली गांव के कुछ लोगों की निजी जमीन इस प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रही है। जमीनी विवाद और आपसी तालमेल की कमी के चलते कुछ स्थानीय लोगों ने काम रुकवा दिया है। आम ग्रामीणों को भी खुलकर यह नहीं पता कि असली विवाद क्या है, लेकिन वे इतना जरूर जानते हैं कि किसी की निजी जमीन के चक्कर में पूरी आबादी को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एक तरफ जश्न, दूसरी तरफ हादसे का डर
सड़क का काम रुकने से इस रूट पर एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां बिंजकोट-दर्रामुड़ा के लोग पक्की सड़क पाकर खुश हैं, वहीं बड़े जामपाली से कुर्रूभांठा के बीच की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इस हिस्से में इतने गहरे गड्ढे हैं कि हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। कुर्रूभांठा के लोग चाहते हैं कि सड़क जल्द से जल्द बने, लेकिन पड़ोसी गांव बड़े जामपाली में मामला अटका हुआ है।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि वे सड़क पूरी बनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक स्थानीय लोग जमीन देने को राजी नहीं होते, तब तक वे मजबूर हैं। फिलहाल इस गतिरोध को सुलझाने की कोशिशें चल रही हैं ताकि बचे हुए हिस्से का निर्माण शुरू हो सके। औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन के ऐसे विवाद होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इस समस्या का जल्द निपटना बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन और कंपनी मिलकर इस जमीनी विवाद को कब तक सुलझा पाते हैं।

