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एसईसीएल की तीन खदानों में एक ही गैंग का वर्चस्व

  • सीएमडी से हुई शिकायत, कार्रवाई के मिले आदेश, ट्रांसपोर्टरों और गाड़ी मालिकों से अवैध वसूली करके खड़ा किया साम्राज्य, बाहरी लोगों के हाथ में खदानों की व्यवस्था

रायगढ़, 17 जनवरी। रायगढ़ जिले की कोयला खदानें बाहर शांत दिखाई देती हैं लेकिन हकीकत में अंदर गैंगवार छिड़ा हुआ है। खासकर एसईसीएल की तीन खदानों में एक ही गैंग का एकाधिकार हो गया है। ट्रांसपोर्टरों और गाड़ी मालिकों से मंथली एंट्री टैक्स लिया जाता है। इसकी शिकायत एसईसीएल सीएमडी से की गई है जिसके बाद कार्रवाई का आदेश दिया गया है। रायगढ़ की बरौद, बिजारी और जामपाली माइंस में सब कुछ सामान्य नहीं है। अब एक गंभीर शिकायत ने एसईसीएल मुख्यालय में भी खलबली मचा दी है। कुछ ट्रांसपोर्टरों ने एसईसीएल सीएमडी को लिखित शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि तीनों माइंस में दिसंबर में तीन दिन तक कोई काम नहीं हुआ क्योंकि ट्रांसपोर्टर और लिफ्टर को घुसने ही नहीं दिया गया।

शिकायत में कहा गया है कि सतीश नामक व्यक्ति ने अपने साथियों के साथ तीनों खदानों को डिस्टर्ब कर दिया। पूरे गैंग में ज्यादातर लोग उप्र, बिहार और झारखंड के हैं जो स्थानीयों को काम नहीं करने दे रहे हैं। गाड़ी मालिकों और ट्रांसपोर्टरों से मंथली वसूली की जाती है। जो देने से इंकार करता है, उसका डीओ का लास्ट डेट आते समय उठाव करने में रुकावट पैदा करते हैं। सेटलमेंट होने के बाद ही उसको उठाव करने दिया जाता है। खदानों में अव्यवस्था पैदा करना, अपना वर्चस्व बनाना और अवैध वसूली ही इस गैंग का उद्देश्य है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों खदानों में चल रही 1000 गाडिय़ों से मंथली एंट्री ली जाती है। नहीं देने पर उसकी गाड़ी नहीं चलने दी जाती। सभी लिफ्टर और ट्रांसपोर्टर इसके सामने मजबूर हैं क्योंकि माइंस में एक गिरोह बन चुका है।

भाड़े के नाम पर भडक़ाता है
शिकायत में कहा गया है कि सतीश पहले जेएसपीएल में काम करता था लेकिन बड़ी गड़बड़ी मिलने पर इसे काम से निकाल दिया गया था। इसने यूनियन बनाकर अब कुछ गाडिय़ां भी ले ली हैं। प्रशासन को भाड़ा का मुद्दा बताकर गुमराह किया जाता है। जबकि वह खुद ट्रांसपोर्टरों से सेटलमेंट करके कम रेट में कोयला उठाता है। खदान में सिर्फ अपनी गाड़ी को प्राथमिकता देने के लिए दबाव डालता है। कोई ट्रांसपोर्टर इससे गाड़ी नहीं लेता तो भाड़े के नाम पर खदान में हंगामा करवाता है। सब एरिया मैनेजर भी इसके खिलाफ शिकायत नहीं करते। 8 से 11 दिसंबर तक खदान को बंद करवा दिया गया जिसकी वजह से गाड़ी मालिकों का बहुत नुकसान हुआ। गुंडागर्दी के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने सीएमडी से लिखित शिकायत की है। इस पर सीएमडी ने जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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