Raigarh

रायगढ़ में ऑपरेशन के दौरान युवक की मौत का मामला: 4 महीने बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र, परिजनों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

रायगढ़। खरसिया सिविल अस्पताल में बवासीर (पाइल्स) के ऑपरेशन के दौरान हुई युवक की संदिग्ध मौत के मामले में चार माह बीत जाने के बाद भी परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है। इस स्थिति से परेशान होकर मृतक के परिजनों ने मंगलवार को कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपा है। परिजनों ने मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाने और इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है।

खरसिया सिविल अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मौत का आरोप

कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक 7 खरसिया निवासी रावेन्द्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने 27 वर्षीय छोटे पुत्र तामेश्वर शर्मा उर्फ पदुम शर्मा को 25 जून को बवासीर के ऑपरेशन के लिए सिविल अस्पताल खरसिया में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने स्टाफ नर्स के साथ मिलकर युवक का ऑपरेशन किया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान ही उसकी मौत हो गई।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए युवक को तुरंत मेट्रो हॉस्पिटल रेफर कर दिया। परिजन जब युवक को लेकर मेट्रो हॉस्पिटल पहुंचे, तो वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर वापस खरसिया आ गए।

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे परिजन, पुलिस पर सुनवाई न करने का आरोप

मृतक के पिता का कहना है कि घटना के चार माह बाद भी उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण वे लगातार भटकने को मजबूर हैं। रावेन्द्र शर्मा ने आवेदन में उल्लेख किया है कि वे इस मामले की शिकायत लेकर खरसिया पुलिस चौकी भी गए, लेकिन वहां केवल आश्वासन दिया जा रहा है और कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले में अब तक संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

सीएम हेल्पलाइन और पूर्व में दिए ज्ञापनों पर भी नहीं हुआ समाधान

परिजनों के अनुसार, वे इस समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करा चुके हैं और पहले भी संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। परिजनों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें जल्द से जल्द मृत्यु प्रमाण पत्र प्रदान कराया जाए।

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