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मनोज राईस मिल में 3370 क्विंटल धान मिला कम

  • किस समिति में हुआ रिसायकल, धरमजयगढ़ के एवन राइस मिल में 2200 क्विंटल धान ज्यादा मिला

रायगढ़, 17 जनवरी। धान खरीदी को लेकर कई स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। एक ओर समिति का सत्यापन हो रहा है। दूसरी ओर किसान के टोकन का सत्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा राइस मिलों में भी जांच हो रही है। महापल्ली के मनोज राइस मिल में जांच हुई तो 3370 क्विंटल धान कम मिला। अब सवाल यह है कि यह धान मिल में लाने के बजाय कहां रिसायकल किया गया। सरकार ने किसानों से केवल वास्तविक उपज बेचने की अपील की थी। किसी गांव में 16 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन होता है तो कहीं 18 क्विंटल। इसी हिसाब से धान खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।

पुराना रबी का धान या उठाए गए नए धान को रिसायकल करने पर कार्रवाई करने को कहा गया है। कलेक्टर ने एसडीएम और तहसीलदारों को सत्यापन कार्य में लगाया है। मिलों में सत्यापन के दौरान महापल्ली के मनोज राइस मिल में जांच की गई। स्टॉक का वेरीफिकेशन हुआ तो पता चला कि उठाए गए धान में 3370 क्विं. कम है। मनोज राइस मिल को जितना धान मिला है, उतना स्टॉक में होना था। बताया जा रहा है कि लोइंग या जामगांव में धान को खपाया गया होगा। इसके साथ ही धरमजयगढ़ के ए-वन राइस मिल में भी भौतिक सत्यापन किया गया। यहां पर 2200 क्विं. धान अधिक पाया गया। बाहर से धान लाकर जमा किया गया था। धान को जब्त किया गया।

मनीष अग्रवाल से जब्त किया था धान
25 नवंबर को भी महापल्ली में जांच की गई थी। तब महापल्ली के राइस मिलर और व्यापारी मनीष अग्रवाल के गोदाम से 2600 क्विंटल धान जब्त किया था। पिछले साल भी लोइंग में फर्जी धान खरीदी हुई थी जिसमें मनीष का नाम सामने आया था। संयुक्त जांच टीम ने मनीष के गोदाम में जांच की जहां से 2600 क्विंटल अवैध धान मिला। डेढ़ महीने बाद ही मनोज राइस मिल में 3370 क्विं. धान कम पाया गया। यह मामला बताता है कि कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है।

दो और मिलों में हुई जांच
शनिवार को राजस्व व खाद्य विभाग की संयुक्त जांच टीम ने पुसौर के ग्राम टपरदा स्थित बिन्नी देवी अरवा राइस मिल की जांच की गई। जांच में रिकॉर्ड से 846 क्विं. धान कम पाया गया। इसके बाद बरपाली स्थित अजंता राइस मिल में भी सत्यापन किया गया। यहां 30 बोरी धान कम पाया गया। भौतिक सत्यापन के बाद मौका पंचनामा बनाया गया। जिले में कई राइस मिलों में जांच चल रही है जिसमें बड़े पैमाने पर रिसायक्लिंग के प्रमाण मिल रहे हैं।

जामगांव में दिया राहुल को प्रभार
लोइंग उपार्जन केंद्र में पिछले साल खरीदी के दौरान पहले 12 दिन तक बोहनी भी नहीं हुई थी। लेकिन इस बार धड़ल्ले से धान आया। पिछले साल सत्यापन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी जिसे दबा दिया गया, तब यहां मनोज प्रधान का पुत्र राहुल प्रबंधक था। इस बार राहुल को जामगांव का प्रभार दिया गया है। दोनों ही समितियों में मनोज राइस मिल का डायरेक्ट लिंक है। जामगांव में तो ओडिशा से भी धान आता है।

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