
खरसिया। जिन खेतों में कुछ सप्ताह पहले तक फसलें लहलहा रही थीं, आज वही खेत पानी की कमी से चिंता में डूबे दिखाई दे रहे हैं। रबी की फसल अंतिम दौर में है और यदि इस समय सिंचाई नहीं मिली तो महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। किसान आशंकित हैं कि समय पर जल उपलब्ध नहीं हुआ तो खड़ी फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगी। क्षेत्र में लगातार गिरते जलस्तर और सूखती नहरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई गांवों में तालाबों का पानी घट चुका है और बोरवेल भी पहले जैसा साथ नहीं दे रहे। खेतों के साथ-साथ पीने के पानी की चिंता भी लोगों को सताने लगी है। ऐसे हालात को विधायक उमेश पटेल ने संभावित जल संकट के रूप में देखा है और इसे तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत वाला विषय बताया है। उनके मार्गदर्शन में खरसिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटी (शहरी एवं ग्रामीण) ने 23 फरवरी को एसडीएम को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
ज्ञापन के माध्यम से कोरबा नहर और आंडपथरा डेम से तुरंत पानी छोड़े जाने की स्पष्ट मांग रखी जाएगी, ताकि सूखी नहरों में जल प्रवाह शुरू हो और खेतों तक समय रहते सिंचाई पहुंच सके। संगठन का मानना है कि यदि अभी कदम नहीं उठाया गया तो फसल ही नहीं, आने वाले महीनों में जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है।कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि यह मुद्दा किसी दल या राजनीति से ऊपर है। यह किसानों की मेहनत, आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरत और पशुधन की प्यास से जुड़ा प्रश्न है। यदि नहरों में पानी छोड़ा जाता है तो तालाब रिचार्ज होंगे, भूजल स्तर को सहारा मिलेगा और गांवों में संभावित पेयजल संकट को भी टाला जा सकेगा। इसी उद्देश्य से कांग्रेस ने क्षेत्र के किसानों से आह्वान किया है कि वे 23 फरवरी को एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचें और जल संकट दूर करने की मांग को मजबूत करें।
संगठन ने संकेत दिया है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों में यह पहल क्षेत्र की लहलहाती फसलों और आम जनजीवन को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसानों, आम नागरिकों और पशुधन से जुड़े जीवन-मरण के प्रश्न को लेकर उठाई जा रही है।

