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ऐश डाईक में चंद्रा क्रशर उद्योग की निजी पोकलेन से धड़ल्ले से ओवरलोडिंग, बेकाबू रफ्तार और उड़ती फ्लाई ऐश ने बढ़ाया खतरा

  • बिंजकोट-दर्रामुड़ा से बड़े जामपाली और कुर्रूभांठा मार्ग तक ट्रांसपोर्टरों की मनमानी से दहशत, ग्रामीण बोले— हादसे से पहले लगे लगाम

खरसिया, 06 अगस्त। खरसिया के बिंजकोट-दर्रामुड़ा इलाके में इन दिनों राह चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। सड़कों पर बेधड़क दौड़ती ओवरलोड गाड़ियाँ, हवा में तैरता राख का गुबार और हर पल मँडराता हादसे का ख़तरा अब यहाँ के लोगों की रोज़ की नियति बन चुका है। कागज़ों पर भले ही नियम-कायदों की दुहाई दी जाती हो, लेकिन ज़मीन पर ट्रांसपोर्टरों की मनमानी और कमाई की अंधी दौड़ ने पूरे इलाक़े का जीना दूभर कर दिया है।

स्थानीय लोगों का साफ़ कहना है कि मेसर्स सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड के ऐश डाईक से बड़े पैमाने पर उड़न-राख यानी फ्लाई ऐश उठाई जा रही है। लेकिन इस काम में लगे ठेकेदारों को न तो लोगों की सलामती की परवाह है और न ही प्रशासन के ख़ौफ़ का। गाड़ियों में क्षमता से कई गुना ज़्यादा राख ठूँस-ठूँसकर भरी जा रही है ताकि कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा चक्कर लगाए जा सकें। इस होड़ में गाड़ियाँ सड़कों पर फर्राटा भरती हैं और पीछे छोड़ जाती हैं राख का ऐसा गुबार, जिसमें सामने का रास्ता तक दिखना बंद हो जाता है।

चंद्रा क्रशर का दबदबा: तीन-तीन पोकलेन उतारकर नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ

इस पूरे खेल के पीछे सबसे बड़ा नाम चंद्रा क्रशर उद्योग का सामने आ रहा है। चर्चा है कि ऐश डाईक के अंदर नियमों को ताक पर रखकर निजी पोकलेन मशीनों का जाल बिछा दिया गया है। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अकेला चंद्रा क्रशर उद्योग वहाँ धड़ल्ले से अपनी तीन-तीन भारी-भरकम पोकलेन मशीनें चला रहा है, जबकि एक अन्य मशीन किसी दूसरे ठेकेदार की है। दिन हो या रात, बिना किसी रोक-टोक के इन मशीनों से हाईवा में ओवरलोडिंग का खेल जारी रहता है। सुरक्षा मानकों को हवा में उड़ाते हुए जिस तरह चंद्रा क्रशर उद्योग डंपरों को ऊपर तक भर रहा है, उससे साफ़ दिखता है कि यहाँ नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाने की खुली छूट मिली हुई है।

सड़क पर जब इन गाड़ियों को रोका जाता है या चालकों से बात होती है, तो कई अलग-अलग ट्रांसपोर्टरों के नाम सामने आते हैं। श्री दाऊजी इंटरप्राइजेज, आदिशक्ति, आशीर्वाद ट्रेडिंग, छाल ट्रांसपोर्ट, आई एंड यू, जिंदल कंस्ट्रक्शन, अनुप रोड, मां अंबे, श्रीजी सर्विस, सृष्टि और सत करतार जैसे दर्जनों नाम इस कारोबार में शामिल हैं। लेकिन इन सब में चंद्रा क्रशर की मनमानी का दबदबा सबसे ज़्यादा नज़र आता है, जिसकी पोकलेन मशीनें दिन-रात बिना किसी डर के डाईक पर गर्जना कर रही हैं।

गर्मी में धुंधलाता रास्ता, बारिश में बिछती मौत की फिसलन

मौसम चाहे जो भी हो, इस मार्ग से गुज़रने वाले राहगीरों के लिए आफ़त कम नहीं होती। गर्मी और सूखे के दिनों में गाड़ियों से झड़ती राख हवा में फैलकर पूरे इलाके को धूल के आगोश में ले लेती है। दोपहिया वाहन चालकों की आँखों में अचानक राख भर जाती है, जिससे गाड़ियाँ अनियंत्रित होकर गिर पड़ती हैं। वहीं, हल्की सी बारिश होते ही सड़क पर बिछी यह राख पानी से मिलकर ऐसा दलदल और फिसलन बनाती है कि गाड़ियाँ ज़मीन पर साबुन की तरह फिसलने लगती हैं। आए दिन बाइक सवार और छोटे वाहन इस चिकनी सड़क पर हादसे का शिकार हो रहे हैं।

मीलों लंबी कतारें, घंटों ठप रहता है जनजीवन

समस्या सिर्फ़ उड़ती राख तक सीमित नहीं है। बिंजकोट-दर्रामुड़ा से लेकर बड़े जामपाली और कुर्रूभांठा तक सड़कों के दोनों ओर खड़े भारी-भरकम हाईवा वाहनों का कब्ज़ा रहता है। गाड़ियों की इतनी लंबी कतारें लग जाती हैं कि रास्ता पूरी तरह छेक लिया जाता है। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे हों, दफ़्तर निकलने वाले नौकरीपेशा या फिर कोई बीमार मरीज, हर कोई इन गाड़ियों के बनाए जाम में घंटों फँसने को मजबूर है। कई जगहों पर तो पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती।

सब्र का बाँध टूटने से पहले जागे प्रशासन, ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

इलाके के लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस ओवरलोडिंग, अंधाधुंध रफ़्तार और चंद्रा क्रशर उद्योग जैसी कंपनियों की दादागीरी पर नकेल नहीं कसी गई, तो यहाँ कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने साफ़ शब्दों में माँग की है कि ऐश डाईक में चल रही निजी मशीनों की जाँच की जाए, सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों का वज़न नापा जाए और नियम तोड़ने वाले ट्रांसपोर्टरों के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार करता है या फिर समय रहते इन बेकाबू ट्रांसपोर्टरों पर लगाम कसता है।

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