
खरसिया। भालूनारा से राबर्टसन स्टेशन तक बदहाल सड़क के निर्माण की मांग को लेकर नवागांव में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है। प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण को लेकर समयसीमा और प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दिए जाने के बावजूद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होता दिखाई देना चाहिए।
जानकारी के अनुसार, भालूनारा से राबर्टसन स्टेशन तक सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश के दौरान कीचड़ की स्थिति के कारण आवागमन प्रभावित होने की शिकायत ग्रामीण लगातार करते रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक सड़क की बदहाली करीब 15 वर्षों से बनी हुई है और बीच-बीच में मरम्मत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इस मार्ग से नवागांव के अलावा चोढ़ा, पामगढ़, छोटे डूमरपाली, भालूनारा, आड़पथरा और रजघट्टा सहित आसपास के गांवों के लोग प्रभावित होते हैं।
विधायक उमेश पटेल पहुंचे धरना स्थल, अधिकारियों का किया इंतजार
बुधवार को तय कार्यक्रम के अनुसार खरसिया विधायक उमेश पटेल नवागांव स्थित धरना स्थल पहुंचे। मंगलवार शाम हुई चर्चा के बाद तय समय पर पहुंचे विधायक ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासनिक अधिकारियों के आने का इंतजार किया।
इस दौरान आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों की मुख्य मांग सड़क निर्माण को लेकर ही रही। विधायक की मौजूदगी में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से सड़क की समस्या झेलने के बाद अब वे केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं।
एसडीएम ने बताया—भालूनारा से राजन कोलवाशरी तक अक्टूबर से काम
दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अनुविभागीय अधिकारी राजस्व खरसिया प्रवीण भगत धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों को सड़क निर्माण की प्रस्तावित स्थिति की जानकारी दी।
एसडीएम के अनुसार, भालूनारा से नवागांव होते हुए राजन कोलवाशरी तक सड़क निर्माण का कार्य करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से 1 अक्टूबर से शुरू हो पाने की संभावना है। वहीं राजन कोलवाशरी से राबर्टसन तक सड़क निर्माण के लिए राशि की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि वर्तमान बारिश की परिस्थितियों में इस हिस्से में तत्काल सड़क निर्माण शुरू करना संभव नहीं है।
यानी प्रशासन ने एक हिस्से के लिए प्रस्तावित कार्यारंभ की समयसीमा बताई है, जबकि दूसरे हिस्से के लिए अभी स्वीकृति की प्रक्रिया बाकी है। यही अंतर ग्रामीणों की असहमति का प्रमुख कारण बनकर सामने आया है।

विधायक ने ग्रामीणों से पूछा—क्या प्रशासन की बात मंजूर है?
प्रशासनिक अधिकारी द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद विधायक उमेश पटेल ने ग्रामीणों के बीच संवाद किया। उन्होंने आंदोलनकारियों से पूछा कि एसडीएम द्वारा दी गई जानकारी और प्रस्तावित व्यवस्था से वे सहमत हैं या नहीं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में अपनी असहमति जताई। उनका कहना था कि सड़क निर्माण जब तक जमीन पर शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सड़क बनने तक उद्योगों के बड़े वाहनों के इस मार्ग पर संचालन का विरोध किया जाएगा।
इस तरह प्रशासन की ओर से दी गई समयसीमा के बावजूद धरना समाप्त नहीं हुआ और ग्रामीणों ने आंदोलन को आगे जारी रखने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों का सवाल—कागज पर प्रस्ताव या जमीन पर काम?
नवागांव का आंदोलन अब केवल सड़क की मरम्मत या निर्माण की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में प्रशासनिक आश्वासन और उसके क्रियान्वयन के बीच का अंतर भी है।
ग्रामीणों का तर्क है कि उन्हें पहले भी सड़क सुधार और मरम्मत के आश्वासन मिलते रहे हैं। यदि सड़क वर्षों से खराब है और बीच-बीच में मरम्मत के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी, तो इस बार वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें निर्माण की स्पष्ट समयसीमा, जिम्मेदार एजेंसी और मौके पर वास्तविक काम दिखाई दे।
उनके लिए भरोसे की कसौटी अब प्रस्ताव या घोषणा नहीं, बल्कि सड़क पर निर्माण सामग्री पहुंचना और काम का शुरू होना है।
उद्योगों के भारी वाहनों पर भी ग्रामीणों का विरोध
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क पर उद्योगों से जुड़े भारी वाहनों के आवागमन को भी मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि जर्जर सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की स्थिति और खराब होती है तथा आम ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी बढ़ती है।
ग्रामीणों की मांग है कि जब तक सड़क का स्थायी निर्माण नहीं हो जाता, तब तक भारी वाहनों के संचालन को नियंत्रित किया जाए। स्थानीय रिपोर्टों में भी ग्रामीणों की ओर से निर्माण शुरू होने तक भारी वाहनों पर रोक लगाने की मांग सामने आई है।
बारिश ने बढ़ाई समस्या
बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। गड्ढों में पानी और कीचड़ भरने से दोपहिया वाहनों के साथ-साथ पैदल आवागमन भी मुश्किल होने की शिकायत है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ता है।
ऐसे में सड़क निर्माण की मांग को ग्रामीण केवल विकास कार्य के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक आवागमन और स्थानीय जनजीवन की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं।

प्रशासन के सामने अब भरोसा कायम करने की चुनौती
धरना स्थल से प्रशासनिक अधिकारी और अन्य अधिकारी लौट गए, लेकिन ग्रामीण आंदोलन पर डटे रहे। प्रशासन ने एक हिस्से के लिए 1 अक्टूबर से काम शुरू होने की संभावित समयसीमा बताई है, जबकि दूसरे हिस्से के लिए वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती घोषित प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की है। यदि 1 अक्टूबर को प्रस्तावित हिस्से में वास्तव में निर्माण कार्य शुरू होता है और शेष मार्ग के लिए भी स्वीकृति एवं निर्माण की स्पष्ट कार्ययोजना सामने आती है, तो आंदोलन को समाधान की दिशा मिल सकती है। इसके विपरीत समयसीमा आगे बढ़ने या प्रक्रिया लंबित रहने की स्थिति में ग्रामीणों का असंतोष और गहरा सकता है।
आंदोलन का संदेश साफ—“सड़क बनने तक संघर्ष”
नवागांव में बुधवार का घटनाक्रम यही संकेत देता है कि ग्रामीण फिलहाल आश्वासन के आधार पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। विधायक पटेल की मौजूदगी, प्रशासनिक अधिकारी की जानकारी और प्रस्तावित कार्यारंभ की समयसीमा के बावजूद आंदोलन जारी रहना इस बात को रेखांकित करता है कि ग्रामीण अब परिणाम चाहते हैं।
ग्रामीणों का संदेश स्पष्ट है—बातचीत का स्वागत है, आश्वासन भी सुना जाएगा, लेकिन आंदोलन तभी समाप्त होगा जब सड़क निर्माण की ठोस शुरुआत जमीन पर दिखाई देगी।
अब निगाह प्रशासन द्वारा बताई गई 1 अक्टूबर की प्रस्तावित कार्यारंभ तिथि, करीब 11 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निर्माण कार्य और राजन कोलवाशरी से राबर्टसन तक सड़क के लिए स्वीकृति प्रक्रिया पर है। यही तीन बिंदु तय करेंगे कि नवागांव का आंदोलन आश्वासन से समाधान की ओर बढ़ता है या फिर सड़क के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहता है।

