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जल, जंगल और जमीन की जंग! रायगढ़ में वेदांता के कोल प्रोजेक्ट के खिलाफ फूटा आदिवासियों का गुस्सा, सांसद को सौंपा ज्ञापन, पढ़िए पूरी खबर

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बड़ी खबर आ रही है। खरसिया विकासखंड के बरगढ़ खोला क्षेत्र में वेदांता कंपनी (बाल्को) द्वारा प्रस्तावित कोयला उत्खनन और सर्वेक्षण कार्य का स्थानीय आदिवासी और निवासी कड़ा विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 8 अगस्त 2022 को लागू किए गए पेसा (PESA) अधिनियम के तहत यहां के निवासियों को जल, जंगल और जमीन पर व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बरई कोल ब्लॉक का आवंटन वेदांता कंपनी को किए जाने से बरगढ़ खोला वनांचल के 12 से अधिक गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। ज्ञापन के मुताबिक, इस क्षेत्र में भारी जनसमूह निवास करता है और यह आदिवासियों की संस्कृति, देवी-देवताओं और पूर्वजों की निशानी से जुड़ा हुआ है।

ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि बरगढ़ खोला क्षेत्र एक प्राकृतिक वनांचल है, जो ऊंचे पहाड़ों और मांद व बोरोई नदियों से घिरा है। ग्रामीणों को डर है कि कोयला उत्खनन से न केवल हजारों एकड़ घने जंगल और वन्यजीव नष्ट हो जाएंगे, बल्कि यहां की ‘बनगहियां’ बोली और संस्कृति भी समाप्त हो जाएगी।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। फिलहाल, अब सबकी निगाहें सांसद के पास पहुंचे इस ज्ञापन पर टिकी हैं कि इस पर क्या कार्रवाई की जाती है?

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