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रायगढ़ पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से हड़कंप: सट्टा कार्रवाई पर परिजनों ने उठाए सवाल, एएसपी बोले – ‘साक्ष्यों के आधार पर हो रही जांच, दुर्भावना का सवाल ही नहीं’

रायगढ़। शहर की शांति व्यवस्था में जहर घोलने वाले अवैध सिंडिकेट्स पर जब कानून का शिकंजा कसता है, तो अक्सर ‘प्रताड़ना’ का कार्ड खेलकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की जाती है। रायगढ़ में इन दिनों ठीक ऐसा ही नजारा दिख रहा है, जहाँ जुआ-सट्टा के खिलाफ पुलिस की आक्रामक कार्रवाई से घबराए अपराधियों ने अब अपनों को आगे कर ‘सियासी’ शोर मचाना शुरू कर दिया है। सोमवार को कथित रूप से सट्टा खिलाने के आरोप में फुन्नु और विकास अग्रवाल को पुलिस ने साइबर लाकर पूछताछ शुरू किया तो परिजनों ने पुलिस कप्तान के दफ्तर में दस्तक दी और पुलिसिया कार्रवाई को व्यक्तिगत रंजिश का नाम दिया। हालांकि, इन आरोपों पर एडिशनल एसपी अनिल सोनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि पुलिस की डिक्शनरी में ‘दुर्भावना’ शब्द नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर गिरफ्तारी के पीछे डिजिटल साक्ष्य, पुख्ता दस्तावेज और तकनीकी इनपुट की एक लंबी फेहरिस्त है। पुलिस का स्पष्ट मानना है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘अपराध’ के खिलाफ है।

ऑपरेशन क्लीन’ से सिंडिकेट्स में हड़कंप

जब से जिले की बागडोर एसएसपी शशि मोहन सिंह के हाथों में आई है, रायगढ़ पुलिस की कार्यशैली में एक बड़ा बदलाव आया है। सट्टा, कबाड़ माफिया और देह व्यापार जैसे अनैतिक कार्यों पर एएसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने चौतरफा हमला बोल दिया है। नतीजा यह है कि आज अपराधी गलियों में छिपते फिर रहे हैं और पहली बार रायगढ़ की सड़कों पर कानून का इकबाल बुलंद होता दिख रहा है।

रसूख की राजनीति रायगढ़ में हावी !

विडंबना यह है कि जब भी पुलिस समाज को गंदगी मुक्त करने के लिए बड़े अपराधियों पर हाथ डालती है, तो पर्दे के पीछे सक्रिय कुछ प्रभावशाली चेहरे उन्हें बचाने के लिए ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। रसूखदार गलियारों से दबाव बनाकर जांच को प्रभावित करने की पुरानी रवायत एक बार फिर सिर उठा रही है। परिजनों को आगे कर पुलिस की ईमानदारी पर कीचड़ उछालना, दरअसल खाकी के बढ़ते कदमों को रोकने की एक सोची-समझी साजिश जान पड़ती है।

बेगुनाह हैं तो डर कैसा?

एक सजग समाज के लिए पुलिस का डर अपराधियों में होना अनिवार्य है। रायगढ़ पुलिस फिलहाल पूरी ईमानदारी से अपराधियों की कमर तोड़ रही है। ऐसे में जो सफेदपोश इन अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि कानून की नजर उन पर भी है। पुलिस के मनोबल को राजनीति के जरिए गिराने की कोशिश शहर के भविष्य के लिए घातक है। लोगों का कहना है कि यदि आरोपीगण बेगुनाह हैं तो उन्हें डरने की कोई बात नहीं है, क्योंकि न्याय के लिए न्यायालय भी बने हैं। लोगों का मानना है कि सरकार को रायगढ़ पुलिस को ‘फ्री हैंड’ दे देना चाहिए। पुलिस बिना सबूत के ऐसा कोई भी काम नहीं करेगी जिससे उनकी साख पर बट्टा लगे।

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