
- मंगल कार्बन हादसे के बाद छोटे उद्योगों में श्रमिकों की होगी जांच, कलेक्टर ने दिए आदेश
रायगढ़। खरसिया में मंगल कार्बन हादसे के बाद जिला प्रशासन ने छोटे उद्योगों में भी जांच अनिवार्य किया है। अब तक गाइडलाइन के मुताबिक बड़े प्लांटों में श्रमिकों की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। छोटे प्लांटों में नियमित निरीक्षण नहीं होता था। लेकिन अब ऐसे छोटे और मझोले उद्योगों में भी नौ सदस्यी टीम जांच करेगी। हाल ही में मंगल कार्बन प्लांट में फर्नेस ब्लास्ट होने की वजह से एक छोटी बच्ची समेत चार की मौत हो गई थी।
बेहद खतरनाक हादसे के बाद यह उजागर हुआ कि ऐसे छोटे-मझोले उद्योग प्रशासनिक जांच से बाहर ही रह जाते हैं। मजदूरों की संख्या कम होने के कारण जांच भी नहीं होती। लेकिन कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए एक संयुक्त टीम बनाई है जो ऐसे उद्योगों का निरीक्षण करेगी। अनुविभाग स्तर पर बनी टीम में एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, जीएम डीआईसी, उप संचालक आईएचएसडी, आरओ पर्यावरण संरक्षण मंडल, सीएमएचओ द्वारा नामित अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ, श्रम निरीक्षक और बीएमओ होंगे।
यह टीम अपने क्षेत्र में चल रहे कारखानों में जांच कर श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जरूरी प्रावधानों की तस्दीक करेगी। कहीं कोई कमी मिलने पर तत्काल सुधार करवाया जाएगा। मंगल कार्बन हादसे ने छोटे उद्योगों में हो रही लापरवाही को सबके सामने लाकर रख दिया। प्लांट मालिकों ने मजदूरों को केवल मशीन की तरह इस्तेमाल किया।
टायर फैक्ट्री, स्लैग क्रशर में हालात बेहद खराब
रायगढ़ जिले में मंगल कार्बन की तरह कई कारखाने हैं। इसके अलावा स्टील प्लांटों से उत्सर्जित स्लैग के लिए स्थापित क्रशर यूनिट भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। इन प्लांटों में सांस से जुड़ी बीमारियां होने के साथ-साथ जान का भी खतरा है। सबसे ज्यादा अप्रशिक्षित मजदूर इन्हीं प्लांटों में होते हैं। पर्यावरण प्रदूषण भी बड़े पैमाने पर होता है।

