Chhattisgarh

जिंदा हैं, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में मृत! राशन-पेंशन बंद, दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोग!

रायपुर। राजधानी समेत प्रदेशभर में जीवित लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। किसी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है तो किसी का राशन कार्ड निरस्त हो चुका है। राज्यभर में इस तरह की 100 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और पीड़ित लोग खुद को जीवित साबित करने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मामलों की पड़ताल से पता चला है कि संपत्ति हड़पने,

वसीयतनामा बदलने, फर्जी तरीके से जमीन बेचने, जीएसटी चोरी करने और बैंक खातों से रकम निकालने जैसे व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसे फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जा रहे हैं। इसके अलावा जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही और बिना भौतिक सत्यापन के रिकॉर्ड अपडेट करना भी इस गड़बड़ी की बड़ी वजह बनकर उभरा है। इस पूरे मामले पर राजस्व विभाग की सचिव और विशेष सचिव से फोन और एसएमएस के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

केंद्रीकृत आंकड़े का अभाव और मतदाता सूची से कटे नाम

हैरानी की बात यह है कि शासन के पास ऐसे फर्जीवाड़े और त्रुटियों का कोई एकीकृत डेटा उपलब्ध नहीं है। जिला स्तर पर आवेदन आने के बाद ही जांच शुरू होती है। दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई शिकायतें बिना किसी ठोस कार्रवाई के ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।

इसी बीच एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प्रदेश की पुरानी मतदाता सूची से 25 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। इनमें से करीब 6 लाख नाम मृत्यु के आधार पर काटे गए। अब कई जीवित मतदाता भी यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें कागजों में मृत दिखाकर मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम कटने की शिकायत संबंधित बीएलओ के पास दर्ज कराई जा सकती है। छूटे नामों को जोड़ने और त्रुटियां सुधारने के लिए बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य करेंगे।

पीड़ितों की आपबीती: कहीं राशन बंद तो कहीं केवाईसी में मृत दर्ज

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए मामलों में पीड़ितों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रायपुर के केलकरपारा की निवासी शाकरा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनका बीपीएल राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। पति के निधन के बाद बुजुर्ग महिला रिकॉर्ड में सुधार कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है।

दूसरा मामला भाटापारा के धुर्राबंधा का है, जहां चरण नामक व्यक्ति की मृत्यु रिकॉर्ड में 15 फरवरी 1970 दर्ज की गई, जबकि प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 की तारीख में जारी हुआ। जीवित व्यक्ति का ऐसा दस्तावेज बनने पर राजेश अग्रवाल ने एसडीएम से शिकायत की है, जिसकी प्रशासनिक जांच जारी है। वहीं कांकेर के चारामा निवासी हलीमा बानो को राशन कार्ड और महतारी वंदन योजना की केवाईसी कराने के दौरान पता चला कि उन्हें कागजों में मृत घोषित किया जा चुका है।

रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और नाम जुड़वाने की तय प्रक्रिया

दस्तावेजों में मृत दर्ज किए जाने की स्थिति में सुधार के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत अथवा जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम या नगर पालिका कार्यालय में आवेदन देना होता है। आवेदक को स्वयं उपस्थित होकर आधार कार्ड, पहचान पत्र और जीवित होने के साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

जांच प्रक्रिया के तहत आवश्यकता पड़ने पर शपथ पत्र, बायोमेट्रिक अथवा जनप्रतिनिधि का सत्यापन कराया जाता है। जांच में पुष्टि के बाद रजिस्ट्रार मृत्यु की गलत प्रविष्टि को निरस्त करता है। यदि मामला जानबूझकर किए गए फर्जीवाड़े का हो, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस सुधार आदेश के आधार पर जमीन, बैंक खाते, राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड दोबारा चालू कराए जा सकते हैं।

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