
- हादसे में घायल बच्ची के पिता और दादा की हालत भी गंभीर, दुर्घटना में हुई पहली मौत
रायगढ़। गत गुरुवार को खरसिया के बानीपाथर में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में टायर गलाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया था। इस दौरान वहां काम कर रहे छह मजदूर और एक दूधमुंही बच्ची बुरी तरह से झुलस गए। बुरी तरह झुलसने के कारण नौ महीने की बच्ची मौत से नहीं लड़ सकी और प्राण त्याग दिए। बच्ची के पिता वेंटिलेटर पर हैं। दो अन्य की हालत भी बेहद गंभीर है। आईएचएसडी और पुलिस कार्रवाई में धाराएं जुड़ेंगी। सोचिए कि बच्ची की मौत की खबर उसके पिता को नहीं मिल पाई है। गुरुवार सुबह हुई बानीपाथर में मंगल कार्बन प्लांट में दर्दनाक हादसा हुआ। अपने खून-पसीना एक कर सेठों को मालामाल करने में लगे मजदूरों की जान दांव पर लग गई।
इतने खतरनाक स्तर का काम करने के वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए प्लांट प्रबंधन ने कोई उपाय ही नहीं किए थे। प्लांट का काम विमल गर्ग संभालते हैं। पुराने टायरों को उच्च तापमान वाली भट्ठी में गलाकर लिक्विड कार्बन में बदला जाता है। बुधवार रात को टायर डाले गए थे, जिसको ठंडा होने के बाद फर्नेस से बाहर निकाला जाना था। एक ओर से कार्बन निकालने के बाद बॉयलर को खोला गया जिसके बाद विस्फोट हो गया। अंदर उच्च तापमान में मीथेन गैस और ऑक्सीजन संपर्क में आए जिसके कारण ब्लास्ट हुआ। अंदर बचा हुआ कार्बन सभी मजदूरों के शरीर में चिपक गया था जिससे आग ने तेजी से उनके शरीर को भी पकड़ लिया।
हादसे में शिव खडिय़ा पिता साहेबराम खडिय़ा 35 वर्ष, साहेबराम खडिय़ा 55 वर्ष, उदासिनी पति शिव खडिय़ा 30 वर्ष, भूमि खडिय़ा 9 माह, कौशल पटेल पिता पतिराम पटेल 20 वर्ष निवासी रजघटा, प्रिया सारथी पति चमार सिंह निवासी ठाकुरदिया 32 वर्ष, राज पिता चमार सिंह और इंद्रीवर पिता चमार सिंह 19 वर्ष बुरी तरह झुलस गए थे। सोमवार को नौ महीने की बच्ची भूमि की मौत हो गई। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 7 ए (1), 7 ए (2) (ए), 7 ए (2) (सी), 41 और 73 के तहत अधिभोगी सह प्रबंधक अविनाश गर्ग को नोटिस जारी किया था। मुख्य प्रबंधक रुपेश शर्मा और मैनेजर प्रेमसागर त्रिपाठी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 125 (ए), 125 (बी), 287, 288, 289 और 3 (5) के तहत अपराध दर्ज किया है।
मां-बाप को नहीं मिली मौत की खबर
जो मजदूर इस टायर फैक्ट्री में अपना हाड़-मांस गलाकर सेठ के लिए लाखों रुपए कमा रहे थे, आज उनकी हालत दयनीय हो चुकी है। बच्ची भूमि के माता-पिता उदासिनी खड़िया और शिव खडिय़ा अस्पताल में ही भर्ती हैं। शिव खड़िया की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। उसको अपने मासूम बच्ची की मौत की कोई जानकारी नहीं है। शिव के पिता साहेबराम की स्थिति भी नाजुक है।
गैर इरादतन हत्या का मामला
ऐसे कई प्लांट हैं जहां मजदूरों के साथ जानवरों जैसा सुलूक किया जाता है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के नियमों का भी इन पर कोई असर नहीं पड़ता। खरसिया में और भी टायर प्लांट और स्लैग क्रशर हैं जहां इसी तरह की हालत है। बड़े प्लांटों में तो ईएसआईसी की मॉनिटरिंग हो रही है लेकिन इन छोटे प्लांटों में कोई नहीं देखता। मजदूर ऐसे ही दिन-रात जूझते हुए हादसे में मर जाता है।

