Raigarh

छोटे के हत्यारे बड़े भाई को आजीवन कारावास की सजा

रायगढ़। होली की रात घरेलू विवाद को लेकर हुए झगड़े में बड़े भाई ने अपने छोटे भाई की डण्डे से इस कदर पिटाई कर दी कि उसके प्राण पखेरू उड़ गये। मामले में आरोपी को सत्र न्यायालय ने हत्या का दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50 रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया गया है। उक्त घटना जूटमिल थाना क्षेत्र की है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार विगत 14 मार्च 2025 को होली त्यौहार के दिन जूटमिल थानांतर्गत ग्राम तरकेला के डीपापारा निवासी पंचराम महंत का मंझला बेटा सुशील कुमार दास व छोटा बेटा निर्मल दास रात मेें तकरीबन 8 बजे बस्ती की ओर से घूम कर आये, तब पंचराम ने दोनों को खाना खाने के लिए कहा। इस पर निर्मल ने तो खाना खाया परंतु सुशील बिना खाये ही सो गया।

वहीं कुछ देर बाद सुशील उठा और दोनों भाईयों के बीच किसी घरेलू बात को लेकर आपस में झगड़ा करने लगे। उन्हें झगड़ते देख पंचराम ने लड़ाई करने से मना किया, लेकिन सुशील ने उसकी एक नहीं सुनी और घर में रखे डण्डे से निर्मल पर पिटने लगा। डण्डे निर्मल के सिर में लगने पर वह जमीन पर गिर गया। वहीं निर्मल के जमीन पर गिरने के बाद भी सुशील उसे लात घूंसों से मारपीट करता रहा। सिर में गंभीर चोट लगने व शरीर में भी अंदरूनी चोट आने की वजह से निर्मल दास ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। वहीं उनके पिता पंचराम ने घटना की सूचना थाने में दी। हत्या की सूचना पर जुटमिल पुलिस टीम मौके पर पहुंची तथा पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजते हुए आरोपी सुशील कुमार दास को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत उसके विरूद्ध जुर्म दर्ज कर न्यायालय में पेश किया था जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। वहीं सत्र न्यायालय में उभयपक्ष की सुनवाई के बाद न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने आरोपी सुशील कुमार दास को अपने भाई निर्मल दास की हत्या करने का दोषी पाया। हत्या के दोषी सुशील कुमार को कोर्ट ने आजीवन कारावास के साथ ही 50 रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी लोक अभियोजक पी. एन. गुप्ता ने की है।

झुठी गवाही देने पर जुर्म दर्ज करने का निर्देश
हत्या के इस मामले में आरोपी सुशील कुमार और मृतक निर्मल दास भाई थे, लिहाजा उसके पिता पंचराम महंत ने अपने बेटे सुशील कुमार को बचाने के लिए न्यायालय में दिये गये बयान में विवेचक उप निरीक्षक गिरधारी साव को मर्ग एवं एफआईआर दर्ज नहीं करवाना बताया गया, जबकि गिरधारी साव ने मर्ग कायम कर पंचराम के तीन पुत्र होने व एक पुत्र अन्य गांव में रहने तथा निज परिस्थितियों में घटना हुई है उसका विवरण भी दिया गया है। गिरधारी साव को पंचराम के परिवार के संबंध में घटना के पहले से जानकारी हो, ऐसा नहीं हो सकता। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि जिन परिस्थितियों में घटना हुई थी उसकी जानकारी पंचराम द्वारा गिरधारी साव को दी गई थी और उसके आधार पर उसने मर्ग इंटीमेशन तथा एफआईआर दर्ज किया था। अपने बेटे को बचाने के लिए पंचराम ने न्यायालय में साक्ष्य के दौरान घटना के संबंध में सही साक्ष्य नहीं दिया गया है। कोर्ट ने मिथ्या साक्ष्य दिये जाने पर पंचराम के विरूद्ध बीएनएस की धारा 383 के तहत अपराध पंजीबद्ध करने जूटमिल पुलिस को निर्देशित किया है।

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