
- लिबरा और लोइंग में संदेहास्पद खरीदी, रात में हो रही बोरे में पलटी, सतर्क एप में आया अलर्ट
रायगढ़, 18 जनवरी। धान खरीदी में इस बार कोई भी बोगस खरीदी या रिसाइक्लिंग न हो, इसके लिए सरकार ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है। रायगढ़ जिले में दिसंबर में तो कोई गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई लेकिन जनवरी में एक पुराने धान माफिया ने पूरे सिस्टम को एक बार फिर से चुनौती दी है। लैलूंगा और धरमजयगढ़ में राहुल नामक इस कोचिया ने पहले की तरह फिर से पुराने धान की रिसाइक्लिंग की है। लिबरा समिति में बड़े पैमाने पर पुराना धान खरीदा गया है जिसके बाद सहायक समिति प्रबंधक निलंबित हुआ है।
लैलूंगा और धरमजयगढ़ की चुनिंदा समितियां राहुल नामक एक धान माफिया की गिरफ्त में हैं। हर साल यह कोचिया लैलूंगा और धरमजयगढ़ की समितियों में धान की रिसाइक्लिंग करवाता है। राजपुर और लैलूंगा समिति में घोटाला सामने आने के बाद इसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद लगा कि माफिया का काम बंद हो गया लेकिन ऐसा नहीं है। दो दिन पहले लिबरा सहायक समिति प्रबंधक आनंदराम पटेल को निलंबित किया गया है। बताया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर पुराने धान को खपाया गया। कई किसानों के खाते में पुराना और नया धान मिलाकर बेचा गया। नमी भी बैलेंस हो गई। ओडिशा से धान लाकर बेचा गया। लिबरा में ही राहुल की भूमिका सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल ने कई किसानों के जरिए धान समिति में पहुंचाया। इसकी तैयारी पहले से कर ली गई थी। पुराना धान सीधे किसान के घर पहुंचाया गया। इस वजह से आनंदराम पटेल को सस्पेंड किया गया। वहीं लोइंग समिति में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। सरकार ने सतर्क एप के माध्यम से भी समितियों की निगरानी की है। लोइंग समिति में रात को बोरे में धान पलटी करते पकड़ा गया है। सतर्क एप में यह गड़बड़ी पकड़ में आई है। कलेक्टर ने सहकारिता विभाग को कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
वजन में हो रहा खेल
अब हुए उठाव में कई राइस मिलर पुराने धान की शिकायत कर रहे हैं। नए धान की मिलिंग में ब्रोकन ज्यादा आ रहा है। जबकि पुराने धान में ही ब्रोकन ज्यादा आता है। नए धान के साथ पुराना मिक्स करने पर कोई पहचान नहीं पाता। इसके साथ ही लोइंग की तरह कई समितियों में धान के बोरे में से धान निकालकर दूसरे बोरे में भरा जा रहा है। मिलर जब वजन कर रहा है तो कमी आ रही है। 40 किलो प्रति बोरे के हिसाब से सौ बोरे का वजन 4000 किलो या 40 क्विंटल होना चाहिए। लोडिंग भी इसी हिसाब से हुई, लेकिन धान निकाले जाने के कारण 40 क्विं. की जगह 39 क्विं. आया। एक क्विं. धान निकालकर दूसरे बोरे में भरा गया।
कापू-लिप्ती में सीतापुर से आया धान
इस बार धरमजयगढ़ के कापू, लिप्ती और छाल केंद्र में धान को नियंत्रित नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि सीतापुर के पास से बाहरी धान यहां पहुंचा है। जंगली इलाका होने के कारण प्रशासन निगरानी नहीं कर पाया। इसी का नतीजा है कि पुराना धान आसानी से लाकर बेचा गया। इसके अलावा जिन नोडल अधिकारियों को खरीदी का जिम्मा दिया गया है, वे दो बजे के बाद गायब हो जाते हैं।

