केलो वृहद् परियोजना पर डीएम मयंक चतुर्वेदी की दो टूक: केलो नहर का काम तुरंत शुरू करने का दिया अल्टीमेटम, रायगढ़-सक्ती के 164 गांवों और 21 हजार हेक्टेयर खेतों की बुझेगी प्यास

- कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने ली बहुप्रतीक्षित केलो वृहद् परियोजना की समीक्षा बैठक
- अधिकारियों और ठेकेदारों को नहरों का शेष निर्माण कार्य तुरंत शुरू करने के सख्त निर्देश
- योजना पूरी होने से रायगढ़ और सक्ती के 164 गांवों की 21,225 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
- सिंचाई के साथ-साथ रायगढ़ शहर को मिलेगा पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत भी होगी पूरी
रायगढ़। केलो वृहद् परियोजना के शेष निर्माण कार्यों को गति देने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जिला कलेक्टोरेट में समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली और बचे हुए सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने परियोजना के अंतर्गत बाकी बची नहर रिच और नहर संरचनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि इन संरचनाओं का निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए। साथ ही अधिकारियों और ठेकेदारों को आपसी समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।
164 गांवों की 21,225 हेक्टेयर भूमि में होगी सिंचाई
समीक्षा बैठक के दौरान कार्यपालन अभियंता मनीष गुप्ता ने बताया कि केलो वृहद् परियोजना रायगढ़ शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम दनौट में केलो नदी पर स्थित है। इस परियोजना के पूरी तरह तैयार होने से रायगढ़ और सक्ती क्षेत्र के कुल 164 गांवों की 21,225 हेक्टेयर भूमि को खरीफ फसल के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी।
परियोजना के तहत रायगढ़ जिले के 156 गांवों की 20,011 हेक्टेयर कृषि भूमि और सक्ती क्षेत्र के 8 गांवों की 1,214 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा।
पेयजल और उद्योगों की जरूरतों में भी मिलेगी मदद
केलो परियोजना से केवल कृषि क्षेत्र को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि यह रायगढ़ शहर की पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अधिकारियों के अनुसार शेष नहरों और संबंधित संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा होते ही किसानों तक पानी पहुंचाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

