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महाघोटाला : ग्राम पंचायत फरकानारा में मनरेगा के नाम पर लूट, सरपंच और प्रतिनिधियों की फर्जी हाजिरी से मजदूरों के हक पर डाका

खरसिया/मंगलेश डनसेना। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिसे ग्रामीण मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, अब भ्रष्टाचारियों की जागीर बन चुकी है। खरसिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत फरकानारा में मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। यहां न केवल आम लोगों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर खुद सरपंच और उनके प्रतिनिधियों के नाम पर भी मस्टररोल भरा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस खुली लूट से सीईओ (CEO) और एपीओ (APO) सहित ब्लॉक के उच्चाधिकारी पूरी तरह अनजान बने हुए हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।

नियमों की उड़ी धज्जियां, सरपंच की भी लगी हाजिरी
मनरेगा के स्पष्ट नियम हैं कि कोई भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि इस योजना के तहत मजदूरी नहीं कर सकता और न ही उसकी हाजिरी चढ़ सकती है। इसके बावजूद, मनरेगा पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि बारह जनवरी को ग्राम पंचायत फरकानारा में चल रहे कार्य में खुद सरपंच भगवती राठिया की हाजिरी दर्ज की गई है। यह सीधा-सीधा सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है और इस बात का प्रमाण है कि जिम्मेदारों को कानून का कोई खौफ नहीं है।

रोजगार सहायक का बेतुका तर्क और घर बैठे हाजिरी का खेल
जब इस भारी अनियमितता पर रोजगार सहायक से जवाब मांगा गया, तो उनका बयान और भी चौंकाने वाला था। अपनी ही बातों में फंसते हुए रोजगार सहायक ने बेतुका तर्क दिया कि वह उस दौरान छुट्टी पर थे और घर बैठे ही हाजिरी चढ़ाते थे। यह बयान अपने आप में एक बड़ा कबूलनामा है। यदि हाजिरी घर से लग रही थी, तो कार्यस्थल की निगरानी कौन कर रहा था? इस बयान से यह साफ हो जाता है कि उस दौरान जो मजदूर काम पर नहीं गए, उनकी भी फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी राशि का गबन किया गया है।

फोटो खिंचवाओ और पैसे पाओ: NMMS प्रणाली का खुला दुरुपयोग
सरकार ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के जरिए कार्यस्थल पर मजदूरों की फोटो खींचकर हाजिरी लगाने का नियम बनाया था, लेकिन पंचायत के रसूखदारों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ लोग केवल NMMS में अपनी फोटो खिंचवाने के लिए कार्यस्थल पर आते हैं और हाजिरी दर्ज होते ही बिना कोई काम किए लौट जाते हैं।

सरपंच प्रतिनिधि की दबंगई और निगरानी तंत्र पर उठते सवाल..?
ग्रामीणों ने इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा आरोप सरपंच प्रतिनिधि प्रीतम राठिया पर लगाया है। पोर्टल के अनुसार, पच्चीस मई से तीस मई तक प्रीतम राठिया की लगातार हाजिरी दर्ज की गई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि प्रतिनिधि साहब केवल मस्टररोल की फोटो खिंचवाने के लिए कार्यस्थल पर पहुंचते थे और फिर वहां से नदारद हो जाते थे।

इस पूरे घटनाक्रम ने ब्लॉक स्तर के निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि रोजगार सहायक को घर बैठे सरकारी हाजिरी पोर्टल चलाने की अनुमति किसने दी? पंचायत स्तर पर हो रहे इस खुले भ्रष्टाचार की भनक जनपद पंचायत के आला अधिकारियों को क्यों नहीं लगी और जब जनप्रतिनिधियों की हाजिरी मस्टररोल में दर्ज हो रही थी, तो बिल पास करने वाले अधिकारियों ने इसे क्रॉस-चेक क्यों नहीं किया? ग्राम पंचायत फरकानारा का यह मामला केवल एक बानगी है। इस फर्जीवाड़े से असली और जरूरतमंद मजदूरों के मुंह का निवाला छीना जा रहा है। ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके।

इनपुट सोर्स – खबर सार

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