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खरसिया के चपले में मनरेगा का ‘महाघोटाला’ : कागजों पर काम पूरा, हकीकत में रात के अंधेरे में चल रही जेसीबी, रोजगार सहायक ने खुद खोली भ्रष्टाचार की पोल!

  • दीपक पटेल की रिपोर्ट…

रायगढ़, 19 अप्रैल 2026। रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत खरसिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत चपले में मनरेगा योजना, जिसे अब वर्तमान में जी-रामजी योजना कहा जाता है, के तहत तालाब गहरीकरण का काम भारी घपले में फंस गया है। सरकारी रिकॉर्ड और गांव में लगे बोर्ड पर तो 8 लाख 75 हजार 500 रुपये का यह काम 31 मार्च 2026 को पूरा हो चुका बताया गया है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। अप्रैल का आधा महीना बीत चुका है और अभी भी वहां काम चल रहा है। रात के अंधेरे में जेसीबी मशीनें चल रही हैं और मिट्टी की चोरी-छिपे खुदाई हो रही है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नियम के मुताबिक मनरेगा का काम केवल जॉब कार्ड धारक मजदूरों द्वारा ही होना चाहिए, लेकिन यहां मजदूरों की जगह जेसीबी और ट्रैक्टरों का राज चल रहा है। रात में मशीनें मिट्टी निकाल रही हैं और उसे अवैध तरीके से बाहर बेचा जा रहा है। भारी वाहनों के आने-जाने से गांव की मुख्य सड़क पूरी तरह टूट गई है। धूल का गुबार इतना है कि लोग चलते-फिरते परेशान हो रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बोर्ड पर साफ-साफ लिखा है कि काम पूरा हो गया, लेकिन मौके पर जाकर देखा जाए तो ताजी खुदाई के निशान हर तरफ दिख रहे हैं। ताजा मिट्टी के ढेर और जेसीबी के पहियों के निशान साफ नजर आ रहे हैं। यह साफ तौर पर शासन को धोखा देने और सरकारी पैसे गबन करने की कोशिश लग रही है।

जब इस मामले में रोजगार सहायक से बात की गई तो उन्होंने कई बड़ी बातें मान लीं। उन्होंने कहा कि असल में काम पूरा नहीं हुआ था, लेकिन विभाग की तरफ से 31 मार्च की डेडलाइन के दबाव में कागजों पर काम पूरा दिखा दिया गया। मशीनों से खुदाई की बात पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शायद कोई बाहर से चोरी-छिपे मिट्टी ले जा रहा होगा। उन्होंने कहा कि वे इसकी शिकायत दर्ज कराएंगे।

रोजगार सहायक ने यह भी माना कि जहां मशीनों से काम हो रहा है, वहां मस्टर रोल में मजदूरों की हाजिरी भरी जा रही है। इस 8 लाख से ज्यादा के प्रोजेक्ट में दर्जनों मजदूरों को काम मिलना चाहिए था, लेकिन उन्होंने बताया कि शुरू में 47-48 मजदूर आ रहे थे, अब धूप ज्यादा पड़ने और शादियों के कारण सिर्फ 5-6 लोग ही एनएमएमएस पर हाजिरी लगा रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि जब कागजों पर काम पूरा हो चुका है तो मौके पर खुदाई किसके आदेश से चल रही है? क्या स्थानीय प्रशासन और तकनीकी अधिकारी इस पूरे घपले से अनजान हैं या फिर उनकी चुप्पी में सहमति छिपी हुई है? चपले गांव के इस मामले ने एक बार फिर मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। ग्रामीण अब इसकी जांच की मांग कर रहे हैं ताकि मजदूरों का हक बच सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।

विडियो इनपुट सोर्स THN24

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