KharsiaRaigarh

खरसिया ब्लॉक में कीचड़ में बैठकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 16 साल से सड़क का इंतजार : भालूनारा से रॉबर्ट्सन तक करीब 7-8 किलोमीटर सड़क की बदहाली के खिलाफ तीसरे दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन

रायगढ़-खरसिया, 19 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया ब्लॉक में भालूनारा से रॉबर्ट्सन तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। नवागांव में चल रहे इस आंदोलन में ग्रामीण खराब सड़क के गड्ढों और कीचड़ के बीच बैठकर विरोध जता रहे हैं। आंदोलन के दौरान एक ग्रामीण के कीचड़ भरे गड्ढे में बैठकर प्रदर्शन करने का वीडियो भी सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 7-8 किलोमीटर लंबे मार्ग की खराब हालत के कारण रोजमर्रा के आवागमन के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। हल्की बारिश के बावजूद मंगलवार को कई गांवों के ग्रामीण धरने पर डटे रहे।

16 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना
ग्रामीणों ने 16 अगस्त से नवागांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है। आंदोलन के पहले दिन एक ग्रामीण सड़क के गड्ढे में भरे कीचड़ में बैठ गया और इसी तरह अपना विरोध दर्ज कराया। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही ने समस्या को और बढ़ा दिया है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।

रवि भगत भी कीचड़ में बैठे
ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देने पूर्व भाजयुमो नेता रवि भगत भी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ कीचड़ भरे पानी में बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सड़क की बदहाल स्थिति की ओर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित करना है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे हैं और उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क निर्माण का काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात ग्रामीणों की ओर से कही गई है।

दूसरे दिन बच्चे भी नारे लगाते पहुंचे
आंदोलन के दूसरे दिन सोमवार को स्कूली बच्चे भी धरना स्थल पर पहुंचे। बच्चों ने सड़क बनवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। ग्रामीणों के मुताबिक खराब सड़क का असर केवल सामान्य आवागमन पर ही नहीं, बल्कि स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर बच्चों ने भी आंदोलन में अपनी आवाज दर्ज कराई। तीसरे दिन मंगलवार को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। हल्की बारिश के बीच जारी प्रदर्शन में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए और सड़क निर्माण की मांग दोहराते रहे।

विधायक उमेश पटेल भी धरने में बैठे
मंगलवार को खरसिया विधायक उमेश पटेल भी ग्रामीणों के समर्थन में आंदोलन स्थल पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठकर सड़क निर्माण की मांग उठाई। इस दौरान ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति और लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर अपनी बात रखी। विधायक ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है कि बारिश के दिनों में गड्ढों और कीचड़ के कारण रास्ते से गुजरना और मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने आंदोलन जारी रखा।

भारी वाहनों से सड़क पर बढ़े गड्ढे
बताया जा रहा है कि रॉबर्ट्सन से भालूनारा तक करीब 7-8 किलोमीटर सड़क लंबे समय से खराब है। ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाता है, जिससे आवागमन और कठिन हो जाता है। भालूनारा, रॉबर्ट्सन, नवागांव, पामगढ़, रजघट्टा, छोटे डूमरपाली और बड़े डूमरपाली समेत कई गांवों के लोगों के इस मार्ग से प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है।

पुरुषोत्तम पटेल बोले- 16 साल से खराब है सड़क
आंदोलन में बैठे पुरुषोत्तम पटेल ने बताया कि सड़क की हालत पिछले करीब 16 साल से खराब है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्या झेल रहे ग्रामीण अब सड़क निर्माण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। उनके मुताबिक खराब सड़क के कारण आसपास के कई गांवों के लोगों को परेशानी होती है और स्कूली बच्चों को भी आवागमन में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर पहले भी संबंधित स्तर पर बात रखी गई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

अधिकारी पहुंचे, लेकिन आंदोलन नहीं थमा
पुरुषोत्तम पटेल के अनुसार सोमवार को प्रशासन के अधिकारी भी ग्रामीणों को समझाने के लिए आंदोलन स्थल पहुंचे थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे, जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो जाता। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन के आधार पर वे धरना समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। इसी मांग को लेकर तीसरे दिन भी ग्रामीण मौके पर डटे रहे। बारिश के बीच जारी आंदोलन से यह साफ है कि सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।

विधायक ने 2022-23 की स्वीकृति का दावा किया
खरसिया विधायक उमेश पटेल ने कहा कि यह सड़क साल 2022-23 में ही स्वीकृत हो चुकी थी। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने दो साल तक सड़क के लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया और बाद में सड़क को बजट से हटा दिया गया। विधायक के अनुसार इसके बाद ग्रामीणों के साथ धरना दिया गया था। उस समय सड़क को बजट में शामिल कर स्वीकृति दिलाने का भरोसा दिया गया था और अक्टूबर 2025 में काम शुरू होने की बात कही गई थी। विधायक का कहना है कि इसके बावजूद सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ।

अनुपूरक बजट में भी शामिल नहीं होने का आरोप
विधायक उमेश पटेल ने बताया कि बाद में सड़क को अनुपूरक बजट में शामिल करने का निवेदन भी किया गया, लेकिन वहां भी इसे शामिल नहीं किया गया। उनके अनुसार अब सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि कई गांवों के लोगों के लिए इस मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं और वे इस आंदोलन को पूरा समर्थन दे रहे हैं। फिलहाल भालूनारा से रॉबर्ट्सन तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है और ग्रामीण सड़क का काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

Show More
Back to top button