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UPI भुगतान पर MDR को लेकर सरकार का रुख साफ, सामान्य उपभोक्ताओं के लेनदेन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त

Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे डिजिटल माध्यमों से UPI भुगतान करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले भुगतानों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

डिजिटल पेमेंट व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों के तहत मर्चेंट लेनदेन से जुड़े नियमों में संशोधन की तैयारी है। हालांकि, इसे लागू करने की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। पहले नए नियमों को 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने की योजना थी, जिसे अब त्योहारी सीजन और व्यापारिक तैयारियों के मद्देनजर जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा सामान्य UPI लेनदेन

सरकार के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने किसी मित्र, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को 5,000 रुपये, 10,000 रुपये या उससे अधिक की राशि बैंक खाते से भेजता है, तो उस पर कोई शुल्क नहीं कटेगा। आम उपभोक्ताओं द्वारा एक-दूसरे को किए जाने वाले सामान्य बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर पूरी तरह शून्य MDR व्यवस्था के तहत सुरक्षित हैं।

MDR वह शुल्क होता है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले व्यापारी पर लगाया जाता है, न कि सीधे ग्राहक पर। सामान्य बैंक खाते से QR कोड स्कैन कर खरीदारी करने या पैसे भेजने की प्रक्रिया ग्राहक के लिए मुफ्त बनी रहेगी। क्रेडिट कार्ड या प्रीपेड वॉलेट से जुड़े नियमों में इससे भिन्न प्रावधान हो सकते हैं।

2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर MDR का प्रस्ताव

सामने आए प्रावधानों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पात्र व्यापारी को 5,000 रुपये का भुगतान मिलता है, तो उसे 20 रुपये MDR शुल्क देना पड़ सकता है। इसी तरह 10,000 रुपये के भुगतान पर यह शुल्क 40 रुपये होगा। यह शुल्क भी व्यापारी स्तर पर लागू होगा, ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन और शून्य MDR व्यवस्था में शामिल छोटे दुकानदारों के भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। सरकार का आकलन है कि देश के लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन इस बदलाव के दायरे से बाहर रहेंगे और पूरी तरह अप्रभावित रहेंगे।

तैयारियों के चलते जनवरी 2027 तक टल सकता है फैसला

नए MDR नियमों के क्रियान्वयन को लेकर सामने आए ताजा घटनाक्रम के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 की तय समयसीमा को बढ़ाकर जनवरी 2027 करने पर विमर्श चल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और भुगतान प्रणालियों को तकनीकी रूप से तैयार करने का पर्याप्त समय मिल सके, इसलिए इस स्थगन की संभावना बनी है। संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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