रायगढ़ में हाथियों की ममता का अद्भुत ‘सुरक्षा चक्र’ : हाथियों ने घेरा बनाकर बचाई नन्हे शावकों की जान! ड्रोन कैमरे में कैद हुई तस्वीर

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगलों से कुदरत की एक बेहद भावुक और अद्भुत तस्वीर सामने आई है, जिसने वन्यजीवों के आपसी प्रेम को बयां कर दिया है। जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत छाल रेंज के कूड़ेकेला परिसर में हाथियों के एक दल ने अपने नन्हे शावकों की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य घेरा बनाकर पैदल मार्च किया। ड्रोन कैमरे में कैद हुई इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कैसे मादा हाथी अपने बच्चों को शिकारियों और अन्य खतरों से बचाने के लिए ढाल बनकर चल रही हैं।बसोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस तस्वीर को ‘प्रकृति का परिवार’ कहा जा रहा है। कूड़ेकेला के पथरीले रास्तों पर जब हाथियों का यह कुनबा आगे बढ़ा, तो गजराजों की सतर्कता देखने लायक थी।
दल के बड़े हाथियों ने दो नन्हे शावकों को अपने बीच में सुरक्षित रखा था, ताकि उन पर आंच न आए। हाथी मित्र दल द्वारा ली गई इस फोटो ने यह साबित कर दिया है कि इंसानों की तरह वन्यजीवों में भी संवेदनाएं और रिश्तों की गहराई कूट-कूट कर भरी होती है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, छाल रेंज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बाद अब यह दल घरघोड़ा रेंज की सीमाओं में प्रवेश कर चुका है। हाथियों की इस आवाजाही को देखते हुए वन विभाग की टीम अलर्ट मोड पर है। हाथी मित्र दल लगातार ड्रोन और अन्य माध्यमों से दल की लोकेशन पर नजर रख रहा है ताकि हाथी और मानव द्वंद्व की किसी भी स्थिति को टाला जा सके। प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की हिदायत दी है।
जिले में 95 हाथियों की सक्रिय मौजूदगी
वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो रायगढ़ जिला इन दिनों हाथियों का प्रमुख रैन बसेरा बना हुआ है। जिले के विभिन्न जंगलों में कुल 95 हाथी अलग-अलग समूहों में विचरण कर रहे हैं। इसमें धरमजयगढ़ वन मंडल में 26 और रायगढ़ वन मंडल में 69 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाथियों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए वन विभाग का अमला चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है और प्रभावित इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जंगली हाथियों की सुरक्षा और ग्रामीणों के बचाव के लिए हाथी मित्र दल की टीमें गांव-गांव जाकर चौपाल लगा रही हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि वे शाम ढलते ही जंगलों की ओर न जाएं और हाथियों को छेड़ें नहीं। वन विभाग का कहना है कि हाथियों का यह दल फिलहाल शांत है और अपने प्राकृतिक रहवास की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य हाथियों को सुरक्षित गलियारा प्रदान करना और जनहानि को रोकना है।
ज्ञात हो की रायगढ़ की पहचान यहां के घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों से है। धरमजयगढ़ और छाल जैसे इलाके हमेशा से हाथियों के पसंदीदा कॉरिडोर रहे हैं। स्थानीय लोगों का हाथियों के प्रति लगाव और वन विभाग की मुस्तैदी ही है कि आज रायगढ़ में वन्यजीवों की ऐसी मनमोहक तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने आ रही हैं। यह घटना रायगढ़ की प्राकृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देती है।

