मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: 456 किमी पिलर और 371 किमी वायाडक्ट का काम पूरा, 8 स्टेशनों पर सिविल वर्क समाप्त

मुंबई। भारत के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना की ताजा प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार, 508 किलोमीटर लंबे इस रूट पर अब तक 456 किलोमीटर तक पिलर (पियर) का निर्माण और 371 किलोमीटर वायाडक्ट (ऊंचे पुल) का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा रूट के 8 स्टेशनों पर सिविल निर्माण पूरा हो चुका है और वर्तमान में वहां आर्किटेक्चरल फिनिशिंग का काम चल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना के तहत 299 किलोमीटर के हिस्से में 6 लाख नॉइज़ बैरियर (शोर रोकने वाले अवरोधक) लगाए जा चुके हैं। वहीं, 206 किलोमीटर वायाडक्ट पर 9,300 ओएचई मास्ट (बिजली के खंभे) भी स्थापित कर दिए गए हैं। ट्रैक संरचना को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए 40 मीटर के स्टैंडर्ड स्पैन का उपयोग किया जा रहा है और वायाडक्ट डेक के ऊपर बैलास्टलेस स्लैब ट्रैक (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) बिछाने की योजना है।
भूमिगत सेक्शन और ठाणे क्रीक के नीचे सुरंग निर्माण
इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में 21 किलोमीटर का हिस्सा भूमिगत (अंडरग्राउंड) है। इस हिस्से में 5 किलोमीटर लंबे एनएटीएम (NATM) सेक्शन की खुदाई पूरी हो चुकी है। इस भूमिगत खंड में ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, जो भारत की पहली समुद्र के नीचे (अंडरसी) तैयार होने वाली रेल सुरंग होगी। इसके अलावा मार्ग में आने वाली 4 पहाड़ी सुरंगों की खुदाई का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
मुंबई का बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन जमीन के नीचे लगभग 10 मंजिल (24 मीटर) गहरा तैयार किया जा रहा है। इस स्टेशन पर 6 ऐसे प्लेटफॉर्म डिजाइन किए गए हैं, जहां 16 कोच वाली ट्रेनें आसानी से आ सकेंगी। यह रूट शिलफाटा के पास से ऊपर उठता है और गुजरात की तरफ अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में आगे बढ़ता है। पूरे मार्ग में यह ट्रेन मुंबई और साबरमती के बीच 25 नदियों और खाड़ियों को पार करेगी।
स्टेशनों, पुलों और रोलिंग स्टॉक डिपो की स्थिति
परियोजना के तहत गुजरात के साबरमती और सूरत के साथ महाराष्ट्र के ठाणे में स्थित तीनों रोलिंग स्टॉक डिपो पर निर्माण कार्य जारी है। सूरत स्टेशन को हीरे (डायमंड) की थीम पर विकसित किया जा रहा है, जिसे मेट्रो, बीआरटीएस और हाईवे से मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी दी जाएगी। वहीं, वडोदरा स्टेशन को मौजूदा रेलवे स्टेशन के पास तैयार किया जा रहा है ताकि यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिले।
अहमदाबाद सेक्शन में मौजूदा रेलवे लाइनों, सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के ऊपर से एलिवेटेड वायाडक्ट निकाला जा रहा है। साबरमती नदी पर बनने वाले पुल में ‘बैलेंस्ड कैंटिलीवर’ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसकी ऊंचाई नदी तल से 36 मीटर है। साबरमती में एक मल्टीमॉडल हब भी बनाया जा रहा है, जो बुलेट ट्रेन, सबअर्बन रेल, मेट्रो और बीआरटीएस सेवाओं को एकीकृत करेगा।
2047 तक हाई-स्पीड नेटवर्क का बड़ा विज़न
508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना देश के व्यापक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक देश में 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जिसकी दिशा में यह कॉरिडोर पहला बड़ा कदम है।

