Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में अमृत 2.0 मिशन: शहरों में पेयजल, सीवरेज और पार्क विकास की क्या है कार्ययोजना?

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शहरी जीवन को सुगम बनाने के लिए मिशन अमृत 2.0 के तहत कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के शहरों में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट, जल स्रोतों के संरक्षण और पार्कों के विकास से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

क्या है अमृत 2.0 मिशन और इसका दायरा?

अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इसके तहत नागरिकों को सुरक्षित नल जल की आपूर्ति, गंदे पानी का वैज्ञानिक उपचार (सीवरेज और एसटीपी), जल निकायों का पुनरुद्धार तथा शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए पार्कों का निर्माण किया जाता है। साथ ही, शहरों के नियोजित विकास के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे जीआईएस (GIS) आधारित मास्टर प्लान का उपयोग किया जा रहा है।

परियोजनाओं की वर्तमान भौतिक और वित्तीय स्थिति

समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार मिशन के तहत राज्य में कुल 81 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं की चरणबद्ध स्थिति इस प्रकार है:

स्वीकृत 81 परियोजनाओं में से 64 को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 45 परियोजनाओं के कार्य आवंटित किए जा चुके हैं, जबकि 19 परियोजनाएं वर्तमान में निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में हैं। शेष 11 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को इस माह के अंत तक स्वीकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पेयजल आपूर्ति: 37 में से 36 परियोजनाओं का काम आवंटित

शहरी आबादी तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना इस मिशन का प्राथमिक अंग है। जल प्रदाय योजना के तहत स्वीकृत 37 परियोजनाओं में से 36 के कार्य आवंटित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त जगदलपुर (बस्तर) जल प्रदाय योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की प्रशासनिक स्वीकृति पर भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया।

सीवरेज ट्रीटमेंट और पार्क विकास के प्रमुख कार्य

राज्य के प्रमुख नगरीय क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और जल शोधन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जा रहा है। अम्बिकापुर, राजनांदगांव, कोरबा, भिलाई एवं दुर्ग में 465.82 करोड़ रुपये की लागत से कुल 333 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता के 9 एसटीपी बनाए जा रहे हैं।

शहरों में ग्रीन स्पेस और पर्यावरण संतुलन बढ़ाने के लिए बीते एक माह में बिलासपुर, मुंगेली, कांकेर और अहिवारा में 4 पार्क विकास परियोजनाओं के कार्य आवंटित किए गए हैं।

शहरी नियोजन के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान

अमृत शहरों के सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक विकास के लिए जीआईएस-आधारित मास्टर प्लान तैयार करने की उप-योजना पर भी कार्य हो रहा है। बैठक में इसके तहत तैयार पुनरीक्षित स्टेट एक्शन प्लान के अनुमोदन की समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन, वित्त, जल संसाधन, आवास एवं पर्यावरण तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसमें भाग लिया।

आगे की राह

मुख्य सचिव ने सभी निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विकास कार्य गुणवत्ता के मानकों का पालन करते हुए तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि शहरी निवासियों को इन सुविधाओं का लाभ समय पर मिल सके।

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