सूरजपुर में मां-बेटी को बेरहमी से मारने वाले तीनों दरिंदों को फांसी, आखिरी ठिकाना बनी रायपुर सेंट्रल जेल

अंबिकापुर जेल में नहीं थी फंदे की व्यवस्था; पुलिसकर्मी से रंजिश में की थी नृशंस हत्या, कातिलों के चेहरे पर नहीं दिखा कोई पछतावा
सूरजपुर। सूरजपुर के चर्चित मां-बेटी हत्याकांड और दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा पाने वाले मुख्य दोषी कुलदीप साहू को शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया। मामले के दो अन्य दोषियों चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को शुक्रवार को ही रायपुर सेंट्रल जेल भेजा जा चुका था। सूरजपुर की विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने हाल ही में हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और नाबालिग बेटी की नृशंस हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषियों को दोहरे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अंबिकापुर सेंट्रल जेल में फांसी देने की व्यवस्था न होने के चलते जेल प्रशासन ने तीनों दोषियों को रायपुर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।
कड़ी सुरक्षा के बीच अंबिकापुर से रायपुर किया गया रवाना
अंबिकापुर सेंट्रल जेल से शनिवार सुबह छह बजे जेल प्रक्रिया पूरी करने के बाद कुलदीप साहू को पुलिस बल और एस्कॉर्ट गाड़ियों के कड़े पहरे में रवाना किया गया। दोपहर 12 बजे उसे रायपुर सेंट्रल जेल में दाखिल कराया गया। अंबिकापुर जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के अनुसार, कुलदीप साहू के अंबिकापुर जेल में रहने के दौरान उसके खिलाफ तीन जेल अपराध दर्ज किए गए थे। अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से उस पर 24 घंटे विशेष निगरानी रखी जा रही थी। जेल अधीक्षक ने बताया कि कुलदीप को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी है और रायपुर सेंट्रल जेल में जेल मैन्युअल के नियमों के तहत तीनों कैदियों को अलग बैरक और सख्त सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा।
डीएनए और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई थी सजा
13 अक्टूबर 2024 की रात हुए इस नृशंस अपराध का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर अदालत में जुर्म साबित किया। अदालत ने माना कि कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह दरवाजा तोड़कर घर में घुसे थे, जहां मुख्य आरोपी ने महिला से दुष्कर्म किया। हमलावरों ने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी पर 33 और बेटी पर 28 बार धारदार हथियार से वार किए थे। वारदात के बाद दोनों को गंभीर हालत में कार में ले जाकर घर से लगभग पांच किलोमीटर दूर खेत किनारे फेंक दिया गया था, जहां अगली सुबह दोनों के शव बरामद हुए। मामले में शामिल चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा पर घर के बाहर रहकर साक्ष्य छिपाने में मदद करने का आरोप रहा।
विवाद का बदला लेने के लिए दिया गया था वारदात को अंजाम
पूरे घटनाक्रम की जड़ में पुराना विवाद और रंजिश सामने आई थी। 9 अक्टूबर 2024 को एक कार्यक्रम के दौरान कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का कुछ लोगों से विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस उसे थाने ले गई थी। भाई के साथ हुई कथित मारपीट से नाराज कुलदीप साहू ने संबंधित पुलिसकर्मी को निशाना बनाने की साजिश रची और उसके घर पर हमला कर दिया। अदालत ने अपने 288 पन्नों के फैसले में इस अपराध को अक्षम्य और समाज के लिए अत्यंत घातक माना। मृत्युदंड का फैसला आने के बाद पुलिस परिवार ने राहत की सांस ली थी। आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषी उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं।

