छत्तीसगढ़ में पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश, मिशन अमृत 2.0 की 9 योजनाओं को मिली मंजूरी

रायपुर। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित औद्योगिक इकाइयों के लिए वार्षिक जल आबंटन प्रदाय की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जल उपयोग में पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने हेतु समुचित जल संग्रहण और प्रदाय सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित उद्योगों, जिनमें स्पंज आयरन, पावर प्लांट, सीमेंट और अन्य विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं, को जलाशयों एवं नदियों से दिए जाने वाले वार्षिक जल प्रदाय तथा नए आबंटन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई।
भू-जल प्रबंधन और उद्योगों के लिए जल संरक्षण के कड़े निर्देश
बैठक में राज्य भू-जल प्रबंधन एवं नियमन प्राधिकरण के गठन को लेकर भी विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने औद्योगिक संस्थानों को अपनी स्वीकृत सीमा के भीतर ही जल उपयोग करने और निर्धारित जल शुल्क का समय पर भुगतान करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाने, वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने तथा वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों को प्रभावी रूप से लागू करने को कहा गया।
पेयजल योजनाओं का अनुमोदन और संतुलित जल बंटवारा
बैठक में मिशन अमृत 2.0 तथा अन्य योजनाओं के तहत कुल 9 पेयजल प्रदाय योजनाओं के लिए स्वीकृत जल आबंटन की पुष्टि और अनुमोदन किया गया। इस निर्णय से प्रदेश के नगरीय निकायों में जलापूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल का संतुलित बंटवारा किया जाए, जिससे आगामी शुष्क मौसम में पेयजल व्यवस्था और कृषि सिंचाई पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
इस बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी, भू-जल वैज्ञानिक और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

